भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, उद्योग-अनुकूल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में आठ बड़े सुधारों की घोषणा की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को रेल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ’52 सप्ताह, 52 सुधार’ अभियान के तहत इन नई पहलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप रेलवे को अधिक सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा रहा है। रेल मंत्री ने बताया कि सबसे अहम सुधार फ्लाई ऐश के सुरक्षित परिवहन से जुड़ा है। अब इसके लिए विशेष बंद वैगनों और कंटेनरों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, सड़क तथा अन्य निर्माण कार्यों में बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
कंटेनर ट्रेन परिचालन के लिए रेलवे ने नई एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था भी लागू की है। अब सभी मार्गों के लिए एक समान 25 करोड़ रुपये का गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क होगा और यह नीति अगले 20 वर्षों तक प्रभावी रहेगी। इससे अधिक कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश का अवसर मिलेगा। रेलवे ने उर्वरकों और अनाज की ढुलाई को भी अधिक पारदर्शी बनाया है। अब मालभाड़ा “प्रति टन प्रति किलोमीटर” के आधार पर तय होगा और कंटेनरों के माध्यम से परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे नुकसान और बर्बादी में कमी आएगी।
इसके अलावा रेलवे परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों के लिए कौशल प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। ठेकेदारी नियमों में भी बदलाव करते हुए निष्पादन सुरक्षा जमा, बीमा और पात्रता संबंधी प्रावधानों को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत उद्योग अपनी जरूरत के अनुसार वैगनों का डिजाइन तैयार कर सकेंगे, जबकि तेल कंपनियां अब विशेष टैंक वैगन खरीदने या लीज पर लेने के लिए स्वतंत्र होंगी। रेलवे का कहना है कि इन सुधारों से माल ढुलाई व्यवस्था अधिक सुरक्षित, तेज, पारदर्शी और उद्योगों के लिए सुविधाजनक बनेगी।


