अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक नया ‘नो-पॉकेट’ ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नियम आम श्रद्धालुओं या पर्यटकों के लिए नहीं, बल्कि केवल उन बैंक और आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारियों पर लागू होगा जो नकदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान चढ़ावे की गिनती का कार्य करते हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, गिनती कक्ष में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाली गहरे नीले रंग की विशेष यूनिफॉर्म या गाउन पहनना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य दान की राशि या कीमती सामान को कपड़ों में छिपाने जैसी किसी भी संभावना को पूरी तरह समाप्त करना है।
सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया जा रहा है। कर्मचारियों की गिनती कक्ष में प्रवेश से पहले और बाहर निकलते समय दो बार तलाशी ली जाएगी। इसके अलावा मोबाइल फोन, पर्स, बैग, कैमरा, चाबियां या अन्य निजी सामान अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। कर्मचारियों को जूते-चप्पल बाहर उतारकर जमीन पर बैठकर दान की गिनती करनी होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे।
हालांकि, इस तरह के नियम भारत में नए नहीं हैं। देश के कई प्रमुख मंदिर वर्षों से पारंपरिक ड्रेस कोड का पालन कराते आ रहे हैं। केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और गुरुवायुर कृष्ण मंदिर में पुरुषों के लिए मुंडू या धोती तथा महिलाओं के लिए पारंपरिक परिधान अनिवार्य हैं। वहीं तिरुपति बालाजी मंदिर में भी पारंपरिक भारतीय वेशभूषा को प्राथमिकता दी जाती है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान विशेष ड्रेस कोड लागू रहता है, जबकि घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और द्वारकाधीश मंदिर में भी मर्यादित एवं धार्मिक गरिमा के अनुरूप वस्त्र पहनने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
राम मंदिर में प्रस्तावित ‘नो-पॉकेट’ ड्रेस कोड सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जबकि श्रद्धालुओं के लिए पहले की तरह दर्शन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


