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वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को मिला ‘ग्रीनको गोल्ड’ सम्मान, पर्यावरण संरक्षण में रचा नया कीर्तिमान

अहमदाबाद मंडल के वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की प्रतिष्ठित ‘ग्रीनको गोल्ड रेटिंग’ प्राप्त की है। पश्चिम रेलवे में यह सम्मान पाने वाला वटवा पहला लोको शेड बन गया है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के वर्ष 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

वटवा लोको शेड ने डीजल आधारित संचालन को पूरी तरह समाप्त कर इलेक्ट्रिक प्रणाली को अपनाया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2022-23 में लगभग 1.88 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई और प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन (Scope-1 Emissions) में लगभग 100 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। ऊर्जा संरक्षण के लिए शेड में पारंपरिक बल्बों और हैलोजन लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगाई गईं, जबकि पुराने पंखों को ऊर्जा-कुशल 5-स्टार BLDC पंखों से बदला गया। ऑक्यूपेंसी सेंसर और एस्ट्रोनॉमिकल टाइमर जैसी आधुनिक तकनीकों ने बिजली की खपत को और कम किया है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में भी शेड ने सराहनीय कार्य किया है। वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 20.5 लाख लीटर पानी संरक्षित किया जा रहा है। वहीं, अहमदाबाद मंडल में स्थापित 1,863 किलोवाट पीक क्षमता के सौर संयंत्रों से हर साल करीब 24.22 लाख यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

वेस्ट मैनेजमेंट के तहत ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ मॉडल अपनाकर कचरे की छंटाई और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया गया है, जिससे सालाना लगभग 38 लाख रुपये की बचत हो रही है। 800 से अधिक वृक्षों के संरक्षण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगातार कमी के साथ वटवा लोको शेड भारतीय रेलवे के हरित भविष्य का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।