रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को ब्लैक मनी एक्ट से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने आयकर विभाग को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक अंबानी के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न की जाए। यह आदेश उस कारण बताओ नोटिस के संदर्भ में दिया गया है, जिसके तहत आयकर विभाग ने उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
आयकर विभाग का आरोप है कि अनिल अंबानी ने करीब 420 करोड़ रुपये के कर की चोरी की है। विभाग के अनुसार यह मामला 814 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अघोषित विदेशी संपत्तियों से जुड़ा है, जो स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में रखी गई थीं। मार्च 2022 में जारी आकलन आदेश में विभाग ने इन संपत्तियों को ब्लैक मनी एक्ट के तहत अघोषित विदेशी संपत्ति माना था।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस. वी. गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति आर. एन. लड्डा की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इसके बाद अदालत ने अनिल अंबानी को अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हुए विभाग को किसी भी कठोर कदम से दूर रहने का निर्देश दिया।
अंबानी ने अपनी याचिका में ब्लैक मनी एक्ट की कुछ धाराओं और वर्ष 2015 की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके माध्यम से कानून को पूर्व प्रभाव से लागू करने की अनुमति दी गई थी। उनके वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल छागला ने अदालत में दलील दी कि जब मामला अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष लंबित है, तब समानांतर रूप से आपराधिक कार्यवाही शुरू करना उचित नहीं है। फिलहाल, अगली सुनवाई तक अनिल अंबानी को राहत मिली हुई है और आयकर विभाग उनके खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं कर सकेगा।









