सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “रेगुलेशन्स फॉर यूज ऑफ एआई इन कोर्ट्स 2026” का ड्राफ्ट जारी किया है। इस प्रस्तावित ढांचे में स्पष्ट किया गया है कि AI का उपयोग केवल सहायक तकनीक के रूप में किया जाएगा और यह किसी भी स्थिति में न्यायाधीश की भूमिका नहीं निभा सकता। अंतिम निर्णय देने का अधिकार पूरी तरह न्यायिक अधिकारियों के पास ही रहेगा। ड्राफ्ट के अनुसार, अदालतों में AI सिस्टम का उपयोग मानवीय प्रधानता, न्यायिक स्वतंत्रता, जवाबदेही और डेटा सुरक्षा जैसे मूल सिद्धांतों के तहत किया जाएगा। इसमें यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी AI सिस्टम बिना मानवीय हस्तक्षेप के न तो फैसला सुना सकेगा और न ही सजा तय कर सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी AI सिस्टम को इस तरह डिजाइन और लागू किया जाए जिससे निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। विशेष रूप से धर्म, जाति, लिंग, भाषा, आर्थिक स्थिति या अन्य संवैधानिक आधारों पर भेदभाव को रोकने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगों, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इस मसौदे पर आम जनता और सभी हितधारकों से 20 जून तक सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।









