भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि CEPA भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में बेहतर पहुंच प्रदान करेगा, जिससे कई प्रमुख क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 10.61 अरब डॉलर था। ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और GCC देशों के बाजारों तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। ऐसे में CEPA दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा। इस समझौते से इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और समुद्री उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, टेक्सटाइल, केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल तथा जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
समझौते के प्रभावी होते ही भारत से कृषि उत्पादों और रत्न-आभूषणों की कई खेपें रियायती शुल्क दरों पर ओमान भेजी गई हैं, जिससे निर्यातकों की लागत कम होगी और नए बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी। विशेषज्ञों के अनुसार CEPA पारंपरिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से अधिक व्यापक है, क्योंकि इसमें वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवा क्षेत्र, निवेश, पेशेवरों की आवाजाही, नियामकीय सहयोग और विवाद समाधान जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल हैं। यह समझौता भारत और ओमान के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









