भारतीय रेल भविष्य की यात्रा को अधिक तेज़, आधुनिक और ऊर्जा-कुशल बनाने के लिए एक बड़े तकनीकी बदलाव की दिशा में काम कर रही है। वंदे भारत 3.0 मिशन के तहत रेल मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से यह मंजूरी दी है कि आने वाली वंदे भारत स्लीपर और हाई-स्पीड ट्रेनों का ढांचा पूरी तरह स्वदेशी एल्युमिनियम बॉडी से तैयार किया जाएगा। वर्तमान में चल रही वंदे भारत ट्रेनें स्टेनलेस स्टील से बनी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एल्युमिनियम का उपयोग करने से ट्रेन का वजन लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वजन घटने से ट्रेन की रफ्तार, एक्सेलेरेशन और ऊर्जा दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। अनुमान है कि ये नई ट्रेनें कुछ ही सेकंड में 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल करने में सक्षम होंगी। साथ ही, हल्के ढांचे के कारण बिजली की खपत भी कम होगी, जिससे संचालन लागत में बड़ी बचत संभव है।
अब तक एल्युमिनियम के विशेष ग्रेड के लिए भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे निर्माण लागत बढ़ती थी। लेकिन नए मॉडल में देश के भीतर ही डिजाइनिंग, वेल्डिंग और असेंबली को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे “मेक इन इंडिया” को और मजबूती मिलेगी। इससे प्रति ट्रेन लागत में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिल सकता है। यह तकनीक खासकर तटीय क्षेत्रों जैसे मुंबई, चेन्नई और ओडिशा के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जहां नमी और नमक के कारण स्टील में जंग लगने की समस्या होती है। एल्युमिनियम बॉडी इस समस्या से काफी हद तक सुरक्षित होती है और ट्रेनों की उम्र 35 से 40 वर्ष तक बढ़ा सकती है। सुरक्षा के लिहाज से इन ट्रेनों में आधुनिक “कवच 4.0” प्रणाली और यूरोपीय मानकों के अनुसार क्रैश-वर्दीनेस डिजाइन शामिल किया जा रहा है। रेलवे का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सैकड़ों वंदे भारत ट्रेनें इस नए स्वरूप में ट्रैक पर उतारी जाएं, जिससे भारतीय रेल वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।









