प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में एक गंभीर साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में कई देशों से जुड़े लोग शामिल थे और इसका संचालन डेनमार्क में बैठे LTTE के पुराने कैडर उमाकांतन द्वारा किया जा रहा था। जांच में चेन्नई के कारोबारी के. बास्करण की भूमिका को भी अहम माना गया है। ED का दावा है कि उनकी कंपनी के बैंक खातों में विदेश से, खासकर डेनमार्क स्थित नेटवर्क से लगभग 1.66 करोड़ रुपये भेजे गए थे। यह रकम कथित रूप से भारत में एक निष्क्रिय बैंक खाते से 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकालने की योजना के लिए इस्तेमाल की जानी थी।
इस मामले में श्रीलंकाई नागरिक लेचुमनन मैरी फ्रांसिस्का का नाम भी सामने आया है, जिसे भारत में एक विशेष मिशन पर भेजा गया था। उस पर आरोप है कि उसने मुंबई स्थित एक पुराने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और नकली पावर ऑफ अटॉर्नी का सहारा लिया। ED के मुताबिक, उसने आधार कार्ड, PAN कार्ड और वोटर ID जैसे भारतीय पहचान पत्र भी हासिल कर लिए थे, जबकि उसका वीजा पहले ही समाप्त हो चुका था।
जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क के कुछ सदस्यों ने अलग-अलग लोगों के जरिए करीब 25 लाख रुपये नकद निकाले और कई संदिग्ध लेन-देन किए। इसके अलावा एक आरोपी को इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए नकली पहचान के साथ मुंबई भेजने की तैयारी भी की गई थी, जिसके लिए उसे भाषा प्रशिक्षण भी दिया गया। ED का कहना है कि इस पूरे ऑपरेशन में शामिल लोगों को भारी आर्थिक लाभ का लालच दिया गया था। कुछ को करोड़ों रुपये में हिस्सेदारी का वादा किया गया, जबकि अन्य को छोटे भुगतान का आश्वासन दिया गया था। मामले में कई अन्य नामों और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है।









