ईद-उल-अजहा के नजदीक आते ही देश में त्योहार की तैयारियों के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल के एक विधायक हुमायूं कबीर ने कुर्बानी और धार्मिक परंपराओं को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी की परंपरा सदियों पुरानी है और यह आगे भी जारी रहेगी। उनके अनुसार, इस धार्मिक अनुष्ठान को कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी ने इसे रोकने की कोशिश की, तो उसे समर्थन नहीं मिलेगा। हुमायूं कबीर ने स्पष्ट रूप से कहा कि गाय, बकरा, ऊंट और अन्य जायज जानवरों की कुर्बानी धार्मिक रीति के अनुसार होती रहेगी।
विधायक ने आगे दावा किया कि एक बड़ा वर्ग इस परंपरा का पालन करता है और इसे किसी भी स्थिति में रोका नहीं जा सकता। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना सही नहीं होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश की गई तो इससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान समुदाय के लिए कुर्बानी धार्मिक आस्था का अहम हिस्सा है और इसमें किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि समुदाय का एक बड़ा हिस्सा गोमांस का सेवन करता है और सरकार द्वारा अधिकृत स्लॉटर हाउसों पर भी सवाल उठाए।
दूसरी ओर, राज्य में सड़क पर नमाज़ पढ़ने के मुद्दे को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि यह मुद्दा किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थानों के उपयोग और कानून-व्यवस्था से जुड़ा है। उनका तर्क है कि कई देशों में भी सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों पर नियम लागू हैं, इसलिए इस विषय को धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि व्यवस्था के नजरिए से देखा जाना चाहिए। कुल मिलाकर, ईद-उल-अजहा से पहले पश्चिम बंगाल में धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तनाव और बयानबाज़ी का माहौल बन गया है।









