हरियाणा सरकार ने 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाला मामले में पांच आईएएस अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए Central Bureau of Investigation (CBI) को मंजूरी दे दी है। यह अनुमति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत दी गई है, जिसके बाद अब जांच एजेंसी संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर सकेगी और उनकी भूमिका की गहन जांच करेगी। मामला IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में सरकारी धन के कथित गबन से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ बैंक अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के कर्मचारियों और लोक सेवकों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से सरकारी रकम निजी खातों में जमा कराई और उसका दुरुपयोग किया।
सूत्रों के मुताबिक, CBI ने आरोपियों के बयानों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर इन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी थी। जांच एजेंसी अब उन प्रशासनिक मंजूरियों की भी पड़ताल करेगी, जिनके जरिए सरकारी विभागों का पैसा निजी बैंकों में जमा कराया गया था। इस मामले में CBI ने हाल ही में चंडीगढ़ और पंचकूला में कई ठिकानों पर छापेमारी कर वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। अब तक इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच एजेंसियां लगातार बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही हैं। हरियाणा सरकार के अनुसार, फरवरी 2026 में विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा गठित जांच समिति ने बैंक खातों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर मामला पहले राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को सौंपा गया, जहां पंचकूला में एफआईआर दर्ज की गई। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को ट्रांसफर कर दी गई।









