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मध्य प्रदेश धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट ने परिसर को मंदिर घोषित किया, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक Bhojshala Complex विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला को मंदिर स्वरूप का स्थल माना है और हिंदू पक्ष की दलीलों को स्वीकार कर लिया है। यह मामला वर्ष 2022 में तब सामने आया जब हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट करने और वहां पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 12 मई को अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।

इस पूरे मामले में परिसर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। हिंदू पक्ष का दावा था कि भोजशाला प्राचीन काल से मां सरस्वती का मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से फैसले से पहले जिले में धारा 163 लागू कर दी गई थी। पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई और किसी भी प्रकार के जुलूस या प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी ताकि कोई भड़काऊ सामग्री न फैले।

मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक अध्ययन किया था। रिपोर्ट में कई ऐसे संरचनात्मक और पुरातात्विक साक्ष्य मिले, जिनमें स्तंभों पर धार्मिक आकृतियां और परमार कालीन शिलालेख शामिल बताए गए। हिंदू पक्ष की मांगों में नियमित पूजा की अनुमति, नमाज पर रोक, और परिसर के प्रबंधन के लिए ट्रस्ट गठन शामिल था। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे धार्मिक स्थल मानकर अपने अधिकारों की रक्षा की मांग करता रहा। फैसले के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा और सख्ती बढ़ा दी है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।