हरियाणा के बिजली निगमों में कथित ‘आईडीएफसी बैंक घोटाले’ ने प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र में हलचल मचा दी है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने अपने मुख्य वित्तीय अधिकारी और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के वित्त निदेशक अमित दिवान को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते बर्खास्त कर दिया है। उन पर पद के दुरुपयोग और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन को गलत खातों में स्थानांतरित करने का आरोप है।
जांच के अनुसार, यह मामला फरवरी 2024 से जुड़ा है, जब चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में ‘HPGCL Dry Fly Ash Fund’ के नाम से एक खाता खोला गया था, जबकि उस समय यह बैंक सरकार की सूचीबद्ध बैंकों में शामिल नहीं था। इसके बावजूद, लगभग 50 करोड़ रुपये इस खाते में जमा किए गए, जो नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में सामने आया है। जांच टीम को इस खाते से जुड़े कई लेन-देन फर्जी पाए गए हैं, जिनका कोई आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। प्रारंभिक निष्कर्षों में यह भी सामने आया है कि धनराशि को कथित तौर पर शेल कंपनियों और निजी संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया, जिससे यह मामला संभावित धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की दिशा में जाता दिख रहा है।
जांच का दायरा केवल एक बैंक तक सीमित नहीं रहा है। आरोप है कि अमित दिवान ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में भी इसी तरह के फर्जी खाते खुलवाए, जिनके जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इस पूरे प्रकरण में कुछ बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच तेज कर दी गई है और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। इस घोटाले के उजागर होने के बाद बिजली निगमों में पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।









