8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। नेशनल काउंसिल (JCM) और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं, जिनका असर लाखों लोगों की आय और भविष्य पर पड़ सकता है। सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी को लेकर है। मौजूदा 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की मांग भी की गई है, जिससे कुल वेतन में बड़ा इजाफा संभव है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्च को देखते हुए यह बदलाव जरूरी है।
इंक्रीमेंट और प्रमोशन के नियमों में भी सुधार की मांग उठी है। वर्तमान 3% वार्षिक बढ़ोतरी को बढ़ाकर 6% करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही 30 साल की सेवा में कम से कम पांच प्रमोशन सुनिश्चित करने और हर प्रमोशन पर अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने की बात कही गई है। भत्तों और छुट्टियों को लेकर भी कई प्रस्ताव सामने आए हैं। HRA, CEA जैसे अलाउंस को तीन गुना बढ़ाने और उन्हें महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ने की मांग की गई है। इसके अलावा मेंस्ट्रुअल लीव, पितृत्व अवकाश और पैरेंट केयर लीव जैसे नए प्रावधान शामिल करने का सुझाव दिया गया है। लीव एनकैशमेंट की सीमा 600 दिन करने की मांग भी उठी है। पेंशन के मामले में कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को खत्म करने की मांग की है। अब इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला सरकार और आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा।









