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ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू, अब गेम की कैटेगरी तय करेगी टैक्स और कानूनी स्थिति

भारत में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है, जो 1 मई से लागू हो चुके हैं। इन नए प्रावधानों के बाद अब किसी भी गेम पर टैक्स और कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह किस श्रेणी में आता है। पहले जहां लोग केवल जीत पर टैक्स को लेकर चिंतित होते थे, अब गेम की प्रकृति ही सबसे अहम आधार बन गई है। नए नियमों के तहत ऑनलाइन गेम की परिभाषा को काफी व्यापक रखा गया है। मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इंटरनेट के जरिए खेले जाने वाले लगभग सभी गेम इस दायरे में शामिल हैं, चाहे वे फैंटेसी स्पोर्ट्स हों, क्विज ऐप हों या मल्टीप्लेयर गेम।

सबसे सख्त श्रेणी ऑनलाइन मनी गेम की है, जिसमें पैसे लगाकर जीतने की उम्मीद की जाती है। ऐसे गेम्स को जोखिमपूर्ण माना गया है और इन पर भारी टैक्स तथा कानूनी सख्ती लागू है। इनसे होने वाली आय पर 30% तक टैक्स लगाया जा सकता है और नुकसान की भरपाई की अनुमति नहीं है। वहीं ई-स्पोर्ट्स को स्किल आधारित प्रतिस्पर्धा माना गया है, लेकिन यहां भी आय पर टैक्स और टीडीएस लागू रहेगा। प्रोफेशनल खिलाड़ियों की कमाई को कई मामलों में बिजनेस इनकम के रूप में देखा जाएगा। इसके विपरीत ऑनलाइन सोशल गेम सबसे सुरक्षित श्रेणी में आते हैं, जिनमें न तो पैसे लगाए जाते हैं और न ही किसी तरह की कमाई होती है। ऐसे गेम्स पर कोई टैक्स नहीं लगता। नए नियमों का मुख्य संदेश यही है कि अब गेमिंग में असली फर्क पैसे के इस्तेमाल का है। अगर पैसे दांव पर हैं, तो टैक्स और कानूनी जोखिम भी उतना ही बढ़ जाएगा।