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विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत की रैंकिंग में गिरावट, वैश्विक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी 2026 के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की स्थिति में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 151वें स्थान से छह पायदान नीचे है। इस गिरावट के साथ भारत को “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में रखा गया है, जो देश में मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताओं को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी प्रेस स्वतंत्रता पिछले 25 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। सर्वे किए गए देशों में आधे से अधिक देशों की स्थिति “कठिन” या “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में पाई गई है। विशेष रूप से कानूनी संकेतकों में भारी गिरावट देखी गई है, जहां पत्रकारिता से जुड़े मामलों में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है। 180 में से 110 देशों में प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई है, जो वैश्विक स्तर पर एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत के पड़ोसी देशों में नेपाल 87वें स्थान पर और पाकिस्तान 153वें स्थान पर है, जो क्षेत्र में प्रेस स्वतंत्रता की असमान स्थिति को उजागर करता है। वहीं वैश्विक स्तर पर नॉर्वे लगातार दसवें वर्ष पहले स्थान पर बना हुआ है, इसके बाद नीदरलैंड, एस्टोनिया, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देश शीर्ष पर हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इरिट्रिया सबसे नीचे 180वें स्थान पर है, जबकि उत्तर कोरिया, चीन, ईरान और सऊदी अरब भी निचले पायदानों पर हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका 64वें स्थान पर है, जहां भी प्रेस स्वतंत्रता में गिरावट दर्ज की गई है। RSF एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1985 में हुई थी और इसका मुख्यालय पेरिस में स्थित है। यह संगठन पत्रकारों की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार की रक्षा के लिए कार्य करता है तथा हर वर्ष प्रेस स्वतंत्रता पुरस्कार भी प्रदान करता है।