Haryana

हरियाणा में पंचायतों को बड़ी ताकत: जल प्रबंधन में मिलेगा Double Fund, महिलाओं को भी रोजगार का मौका

हरियाणा सरकार ने ग्रामीण जल व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ‘ग्रामीण जल संरक्षण अभियान’ के तहत पेयजल आपूर्ति और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी अब सीधे ग्राम पंचायतों को सौंप दी है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की नई ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के बाद गांवों में पानी की आपूर्ति, मोटर संचालन और पाइपलाइन मरम्मत जैसे फैसले अब पंचायत स्तर पर लिए जाएंगे। इस नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू वित्तीय प्रोत्साहन है। सरकार ने तय किया है कि पंचायतें जल शुल्क (वाटर टैक्स) के रूप में जितनी राशि एकत्र करेंगी, उतनी ही अतिरिक्त ‘मैचिंग ग्रांट’ राज्य सरकार उनकी विकास निधि में देगी। इससे गांवों के जल प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए पंचायतों के पास दोगुना बजट उपलब्ध होगा।

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए बिल वसूली कार्य में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण महिलाएं अब घर-घर जाकर जल बिलों की वसूली करेंगी, और इसके बदले उन्हें कुल वसूली का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगी। इससे न केवल विभाग की बकाया वसूली में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलेगा। नई नीति के तहत पंचायतों को कानूनी अधिकार भी दिए गए हैं। अब नए जल और सीवर कनेक्शन के लिए आवेदन BISWAS पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर ही होंगे। इसके साथ ही अवैध कनेक्शन काटने और जल बर्बादी पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी पंचायतों को दिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण नागरिक को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। शिकायत निवारण व्यवस्था को भी सरल बनाते हुए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि सभी समस्याओं का समाधान ऑनलाइन पोर्टल और पंचायत स्तर पर ही किया जाएगा।