भारत और जर्मनी के बीच लगभग 8 अरब डॉलर का बहुप्रतीक्षित पनडुब्बी सौदा जल्द अंतिम रूप ले सकता है, जो भारतीय नौसेना की क्षमताओं को एक नई मजबूती देगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया जर्मनी दौरे के दौरान इस डील को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी भरोसा जताया है कि समझौता जल्द साइन होगा।
यह परियोजना ‘प्रोजेक्ट 75(I)’ के तहत आगे बढ़ रही है, जिसमें जर्मनी की ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) और भारत की Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) मिलकर 6 अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियां बनाएंगी। खास बात यह है कि इनका निर्माण भारत में ही होगा।
इन पनडुब्बियों में Air Independent Propulsion (AIP) तकनीक होगी, जिससे वे लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी। साथ ही, उन्नत स्टेल्थ डिजाइन के कारण ये दुश्मन के रडार और सोनार से बचने में सक्षम होंगी। आधुनिक सेंसर और टारगेटिंग सिस्टम इन्हें दूर से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और सटीक हमला करने की क्षमता देंगे।
भारत की मौजूदा कई पनडुब्बियां 25 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं, ऐसे में यह सौदा उनकी कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट से ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती मिलेगी-शुरुआत में लगभग 45% स्वदेशीकरण, जो अंतिम चरण तक 60% तक पहुंच सकता है। रणनीतिक रूप से भी यह कदम महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी और चीन तथा पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।









