भारत अपनी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने देश में ही विकसित किए जाने वाले लॉन्ग रेंज सर्विलांस रडार (LRSR) के लिए उद्योग जगत से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह पहल पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के अनुरूप है और इसका उद्देश्य पुराने निगरानी सिस्टम को आधुनिक तकनीक से बदलना है।
यह नया रडार सिस्टम अत्याधुनिक 4D AESA तकनीक पर आधारित होगा और इसमें स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक रडार को अधिक शक्तिशाली, ऊर्जा-कुशल और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग से सुरक्षित बनाएगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी गतिशीलता होगी, क्योंकि इसे वाहनों पर लगाकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकेगा।
नया सिस्टम 450 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हवाई लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम होगा और लगभग 40 किलोमीटर की ऊंचाई तक निगरानी कर सकेगा। इससे बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और स्टेल्थ तकनीक वाले लड़ाकू विमानों तक को ट्रैक करना संभव होगा।
इसके साथ ही इसमें विशेष X-बैंड रडार भी शामिल होगा, जो छोटे ड्रोन, क्वाडकॉप्टर और ड्रोन झुंड जैसी उभरती चुनौतियों का भी प्रभावी रूप से पता लगा सकेगा। यह क्षमता हाल के समय में बढ़ते ड्रोन खतरों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह रडार सिस्टम 5,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले कठिन इलाकों और -40°C से +50°C तक के चरम तापमान में भी काम करने में सक्षम होगा। भविष्य में यह प्रणाली मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क के साथ मिलकर एक मजबूत और समन्वित सुरक्षा ढांचा तैयार करेगी, जिससे देश की आकाशीय निगरानी और अधिक प्रभावी बन सकेगी।









