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महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने उठाए लागू करने के तरीके पर सवाल

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जहां केंद्र सरकार इसे संसद में लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दलों ने इसके लागू करने के तरीके पर कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरकार की प्रक्रिया और मंशा पर सवाल उठा रहा है।

विपक्षी दलों की बैठक के बाद खरगे ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से इस विधेयक का समर्थन करती रही है, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में कई खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों को जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि इससे संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि इसे स्पष्ट समयसीमा के साथ लागू किया जाए। परिसीमन के प्रावधान को लेकर उन्होंने कड़ा विरोध जताया। वहीं, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने चेतावनी दी कि परिसीमन का प्रस्ताव देश के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी इस मुद्दे पर संसद में विरोध दर्ज कराएगी।

इधर आम आदमी पार्टी ने भी विपक्ष का साथ देते हुए कहा कि बिना जनगणना के परिसीमन करना राज्यों के साथ अन्याय होगा। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान ढांचे में ही आरक्षण लागू किया जाए तो वह समर्थन पर विचार कर सकती है। कुल मिलाकर, विधेयक के समर्थन के बावजूद उसके क्रियान्वयन को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है, जिससे संसद में तीखी बहस की संभावना है।