भारतीय नौसेना ने अपने बेड़े को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आज विशाखापट्टनम में आयोजित समारोह के दौरान नई पीढ़ी का स्टेल्थ फ्रिगेट INS तारागिरी (F-41) नौसेना में शामिल हुआ। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी उपस्थित थे।
प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित यह फ्रिगेट उच्च स्तरीय सेंसर, आधुनिक युद्ध प्रणाली और मल्टी-रोल क्षमताओं से लैस है। इसका डिजाइन समुद्र, हवा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में प्रभावी संचालन के लिए तैयार किया गया है। ब्रहमोस सुपरसोनिक मिसाइल जैसी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली इसे रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को सशक्त करने के साथ-साथ हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में देश की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करेगा। अधिकारी मानते हैं कि यह कदम नौसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने और बेड़े के मॉडर्नाइजेशन की प्रक्रिया को और गति देगा।
विशेष रूप से यह जहाज 6,670 टन का विशाल फ्रिगेट है, जिसे मुंबई स्थित मज़गांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL)aa में निर्मित किया गया। इसे ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी इंजीनियरिंग कौशल का प्रतीक माना जा रहा है। प्रोजेक्ट 17A श्रेणी के चौथे जहाज के रूप में, तारागिरी पिछले डिजाइन की तुलना में आधुनिक तकनीक और बेहतर ऑपरेशनल क्षमता के साथ तैयार हुआ है।
आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल ताकत, युद्ध तैयारी और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत अपने क्षेत्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों में प्रभाव बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है।









