दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयासों के बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में स्थित 462 ऐसी औद्योगिक इकाइयों की पहचान की है, जिन्होंने प्रदूषण की निगरानी के लिए अनिवार्य उपकरण नहीं लगाए हैं या मानकों के अनुरूप उनका उपयोग नहीं कर रही हैं। इन इकाइयों पर अब जुर्माना या बंदी जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है।
सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के लिए ऑनलाइन कंटीन्यूअस इमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) लगाना अनिवार्य किया है। यह सिस्टम सेंसर और कैमरों के जरिए फैक्ट्रियों से निकलने वाले उत्सर्जन की रियल टाइम निगरानी करता है और डेटा सीधे CPCB के सर्वर तक पहुंचता है। इससे अधिकारियों को तुरंत पता चलता है कि कौन सी इकाई तय सीमा से ज्यादा प्रदूषण फैला रही है।
जांच में सामने आया कि कई फैक्ट्रियों ने या तो यह सिस्टम लगाया ही नहीं या फिर उनके उपकरण मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जिससे उत्सर्जन की सटीक निगरानी संभव नहीं हो पा रही। इसे गंभीर उल्लंघन मानते हुए CPCB ने राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन इकाइयों में हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड़ और राजस्थान के अलवर जैसे औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। CPCB का कहना है कि रियल टाइम डेटा की कमी प्रदूषण नियंत्रण में बड़ी बाधा है और यह कार्रवाई उद्योगों को जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम है।









