केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर समाचार और करंट अफेयर्स शेयर करने वाले उपयोगकर्ताओं को भी नियमों के दायरे में लाना है। यह कदम डिजिटल मीडिया पर नियामक निगरानी को और व्यापक बनाने की दिशा में उठाया गया है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या ऑनलाइन मध्यस्थ ऐसे कंटेंट को होस्ट, साझा, अपलोड, प्रकाशित या अपडेट करता है, जिसे स्वयं उपयोगकर्ता पब्लिशर नहीं हैं, उसे नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसका मतलब यह है कि केवल रजिस्टर्ड डिजिटल मीडिया पब्लिशर ही नहीं, बल्कि आम यूजर्स द्वारा साझा की गई न्यूज और करंट अफेयर्स भी नियामक नजर में आएंगी।
मसौदे में नए नियम 3(4) का प्रावधान शामिल किया गया है, जिसमें यह साफ किया गया है कि बिचौलियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत ‘ड्यू डिलिजेंस’ दायित्वों का पालन करना होगा। इसमें मंत्रालय द्वारा जारी किए गए निर्देश, SOPs और दिशानिर्देशों के पालन की जिम्मेदारी शामिल है। साथ ही, डेटा संरक्षण और सुरक्षा के नियम अन्य कानूनों के तहत लागू दायित्वों के साथ बनी रहेंगी।
इसके अलावा, प्रस्ताव में डिजिटल कंटेंट के रेगुलेशन को मजबूत करने के लिए अंतर-विभागीय समिति के अधिकारों और दायरे का विस्तार करने की योजना है। समिति अब केवल शिकायतों पर विचार नहीं करेगी, बल्कि मंत्रालय द्वारा सीधे भेजे गए मामलों की भी समीक्षा करेगी।
केंद्र सरकार ने हितधारकों से इस मसौदे पर सुझाव और प्रतिक्रिया मांगी है, जिसकी अंतिम तारीख 14 अप्रैल, 2026 निर्धारित की गई है। यह कदम डिजिटल मीडिया में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।









