विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के अगले दिन, ओम बिरला ने आज लोकसभा में अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। विपक्ष द्वारा लगाए गए पक्षपात के आरोपों का जवाब देते हुए बिरला ने स्पष्ट किया कि वे हमेशा सभी सांसदों को नियमों के अनुसार बोलने की अनुमति देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी सदस्य को बोलने से रोकना उनकी नीति के विपरीत है, लेकिन सदन के नियम और प्रक्रियाओं के तहत ही सभी सदस्य अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।
बिरला ने सदन में कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि लोकसभा की कार्यवाही निष्पक्ष, अनुशासित और संतुलित ढंग से संचालित हो। अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिलने पर उन्होंने नैतिक कर्तव्य निभाते हुए अपने आप को कार्यवाही से अलग रखा। उन्होंने सदन द्वारा अपने ऊपर जताए गए विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया और इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाने का आश्वासन दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद के नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं—चाहे वे प्रधानमंत्री हों, मंत्री, विपक्ष के नेता या अन्य सदस्य। इस नियम का पालन करना सदन का धर्म है, और इसे उन्होंने हमेशा सुनिश्चित किया है। बिरला ने यह भी याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह तीसरी बार था जब लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। हालांकि, कांग्रेस ने एलपीजी मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने देने की मांग करते हुए शोर-शराबा किया, जिससे सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। बिरला ने अंत में दोहराया कि उनका उद्देश्य सदन की कार्यवाही को नियम और अनुशासन के दायरे में रखते हुए चलाना और सभी सांसदों को समान अवसर देना है।









