ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है। पहले भारत सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर तेल-गैस आयात करता था, जो ज्यादातर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता था। लेकिन मौजूदा हालात में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण सरकार ने दूसरे देशों से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस फिलहाल भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरा है। मार्च के पहले 11 दिनों में रूस से तेल आयात करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो फरवरी में लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। इंडियन ऑयल और रिलायंस जैसी कंपनियों ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल के सौदे किए हैं।
इसके अलावा भारत ने अमेरिका से भी कच्चे तेल और एलएनजी की खरीद बढ़ाई है। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए गेल ने अमेरिका के साथ गैस के बड़े समझौते किए हैं। वहीं पहली बार भारत ने गुयाना से सीधे कच्चा तेल मंगवाया है। इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने वहां से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। साथ ही नाइजीरिया और अंगोला जैसे पश्चिमी अफ्रीकी देशों से भी अतिरिक्त तेल आयात किया जा रहा है।
प्राकृतिक गैस की कमी को दूर करने के लिए भारत ने अल्जीरिया, नॉर्वे और कनाडा से एलपीजी और एलएनजी सप्लाई के लिए संपर्क बढ़ाया है। फिलहाल दो बड़े एलएनजी कार्गो भारत के रास्ते में हैं। भारत रोज करीब 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है और अपनी 88 फीसदी जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में सरकार अब अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।









