इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान कंपनी ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिलाया कि यूजर्स का डेटा उसकी पेरेंट कंपनी Meta Platforms के साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए साझा नहीं किया जा रहा है और वह Competition Commission of India (CCI) के सभी निर्देशों का पालन करेगी।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने व्हाट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कंपनी की टेक्नोलॉजी पारदर्शी है और यूजर प्राइवेसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं उठता। कंपनी ने अदालत को यह भी बताया कि 16 मार्च तक आवश्यक बदलाव लागू कर दिए जाएंगे।
यह पूरा विवाद वर्ष 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट से जुड़ा है, जिसमें फोन नंबर, डिवाइस जानकारी और बिजनेस अकाउंट इंटरैक्शन जैसे डेटा को मेटा समूह की कंपनियों के साथ साझा करने की शर्तें शामिल थीं। इस अपडेट को लेकर ‘टेक इट ऑर लीव इट’ नीति की आलोचना हुई थी और प्राइवेसी व प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं, जिसके बाद CCI ने जांच शुरू की थी।









