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क्या भारत को मिलेगी Iron Dome टेक्नोलॉजी? S-400 के साथ बन सकती है मल्टी-लेयर डिफेंस शील्ड

प्रधानमंत्री Narendra Modi के संभावित इजराइल दौरे के दौरान एक बड़ी रक्षा साझेदारी पर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक भारत को इजराइल की आयरन डोम मिसाइल डिफेंस प्रणाली की तकनीक ट्रांसफर किए जाने की संभावना है। यह सौदा केवल खरीद तक सीमित न रहकर ‘मेक इन इंडिया’ मॉडल के तहत भारत में निर्माण पर आधारित हो सकता है, जिससे देश की हवाई सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

आयरन डोम को दुनिया की सबसे प्रभावी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस प्रणालियों में गिना जाता है। यह कम दूरी की मिसाइलों, रॉकेटों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है और इसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है। हाल के संघर्षों में इसने बड़ी संख्या में रॉकेट और ड्रोन हमलों को विफल कर अपनी उपयोगिता साबित की है। भारत के लिए यह तकनीक सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक शहरों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

रक्षा सूत्रों का कहना है कि भारत पहले से रूस के S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम को शामिल कर चुका है, जिसकी 2018 में लगभग 5 अरब डॉलर की डील हुई थी। S-400 करीब 400 किलोमीटर तक की रेंज में फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है। यदि आयरन डोम को भी भारतीय नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो देश के पास लंबी, मध्यम और कम दूरी की परतों वाला एक मजबूत मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार हो सकता है।

रणनीतिक दृष्टि से यह व्यवस्था ऐसे काम कर सकती है कि सबसे बाहरी परत में S-400 लंबी दूरी के खतरों को रोके, मध्य परत में स्वदेशी और अन्य मीडियम रेंज सिस्टम सक्रिय रहें और सबसे अंदर की परत में आयरन डोम ड्रोन, रॉकेट और कम दूरी की मिसाइलों को निष्क्रिय करे। हाल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों के बाद भारत ने महसूस किया है कि ड्रोन स्वॉर्म और नजदीकी हमलों से निपटने के लिए तेज प्रतिक्रिया देने वाली अलग प्रणाली आवश्यक है, जहां आयरन डोम उपयोगी साबित हो सकती है।

यदि तकनीक हस्तांतरण के साथ यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो भारत में उत्पादन से रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम माना जाएगा। फिलहाल यह मामला प्रारंभिक चर्चा के दौर में है, लेकिन S-400 और आयरन डोम का संभावित संयोजन भारत की हवाई सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।