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भारत की नजर FCAS पर: फ्रांस-जर्मनी प्रोग्राम टूटा तो छठी पीढ़ी के फाइटर में एंट्री की तैयारी

भारत ने संकेत दिया है कि यदि फ्रांस और जर्मनी के संयुक्त छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम Future Combat Air System (FCAS) में दरार आती है, तो वह इसमें शामिल होने पर विचार कर सकता है। यह कदम भारत के लिए उन्नत स्टेल्थ तकनीक और अगली पीढ़ी की युद्धक क्षमताएं हासिल करने का एक बड़ा रणनीतिक अवसर माना जा रहा है। FCAS का उद्देश्य 2040 के दशक में फ्रांस के Dassault Rafale और यूरोप के Eurofighter Typhoon की जगह नई पीढ़ी का लड़ाकू विमान तैयार करना है।

इस कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा मुख्य मानव-संचालित विमान New Generation Fighter (NGF) होगा, जो ड्रोन के साथ मिलकर नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली में काम करेगा। सूत्रों के मुताबिक भारत ने खास तौर पर NGF के सह-विकास और सह-उत्पादन में रुचि दिखाई है। हालांकि फ्रांस की Dassault Aviation और जर्मनी की Airbus के बीच डिजाइन नियंत्रण और काम के बंटवारे को लेकर मतभेद सामने आए हैं। फ्रांस चाहता है कि विमान उसके भविष्य के एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सके, जबकि जर्मनी लंबी दूरी के भारी इंटरसेप्टर मॉडल पर जोर दे रहा है। ऐसे में कार्यक्रम के दो हिस्सों में बंटने की संभावना भी जताई जा रही है।

NGF को 30,000 से 32,000 किलोग्राम अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले भारी फाइटर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। वजन के लिहाज से यह अमेरिका के F-22 Raptor और रूस के Sukhoi Su-57 के करीब माना जा रहा है। यदि भारत इस परियोजना में शामिल होता है, तो यह उसकी स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) से एक स्तर ऊपर की क्षमता दे सकता है, हालांकि यह भारतीय वायुसेना के मौजूदा Sukhoi Su-30MKI से हल्का रहेगा।

FCAS के लिए वैरिएबल साइकिल इंजन विकसित किया जा रहा है, जिसमें फ्रांस की Safran, जर्मनी की MTU और स्पेन की ITP Aero शामिल हैं। खास बात यह है कि Safran भारत के AMCA Mk2 के लिए 120 किलो न्यूटन इंजन के सह-विकास में भी सहयोग कर रही है, जिससे भारत-फ्रांस रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं। फिलहाल यह मामला प्रारंभिक स्तर की बातचीत में है, लेकिन यदि फ्रांस-जर्मनी साझेदारी कमजोर पड़ती है, तो भारत के लिए यह छठी पीढ़ी की तकनीक हासिल करने का एक बड़ा रणनीतिक अवसर साबित हो सकता है।