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आठ महीने की हिरासत के बाद बिक्रम मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, अकाली दल को बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में जमानत प्रदान की है। अदालत ने यह निर्णय लेते समय उनकी पिछले सात महीनों से चल रही हिरासत को अहमियत दी। मजीठिया की याचिका सुप्रीम कोर्ट में उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के इस निर्णय पर गौर करते हुए जमानत की मंजूरी दी।

पिछले साल 25 जून को पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने मजीठिया को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक, लगभग 540 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। पहले, 4 दिसंबर को हाई कोर्ट ने मजीठिया की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि जमानत मिलने पर वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश भी दिया था।

मजीठिया के खिलाफ मामला 2021 में मादक पदार्थ से जुड़े एक व्यापक मामले की जांच से जुड़ा हुआ है, जिसे पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम संभाल रही है। सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने यह भी बताया कि पहले उन्हें मादक पदार्थ अधिनियम के तहत अलग मामले में जमानत मिल चुकी है। बिक्रम सिंह मजीठिया शिरोमणि अकाली दल के अनुभवी नेता हैं और उन्होंने 2007 से 2022 तक पंजाब में विधायक के रूप में कार्य किया। उन्होंने राज्य सरकार में राजस्व, पर्यावरण, जल आपूर्ति और जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। मजीठिया, SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बहनोई और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल के भाई भी हैं।