Chandigarh National

सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के संकट पर जताई सख्त नाराजगी, बिल्डर माफिया पर तीखा हमला

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के लगातार सूखने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बिल्डर माफिया और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि झील को कितना और नुकसान पहुंचाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राजनीतिक संरक्षण और कुछ नौकरशाहों की मिलीभगत के कारण अवैध निर्माण को बढ़ावा मिला है, जिससे झील का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

यह टिप्पणी 1995 से लंबित पर्यावरण संबंधी जनहित याचिका ‘इन रे: टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद’ से जुड़े अंतरिम आवेदनों की सुनवाई के दौरान की गई। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ कर रही थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जंगलों और झीलों से जुड़े मामले सीधे सुप्रीम कोर्ट में क्यों लाए जा रहे हैं, जबकि उच्च न्यायालय इन पर निर्णय लेने में सक्षम हैं। पीठ ने संकेत दिया कि कुछ निजी डेवलपर्स के इशारे पर कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने के लिए पहले भी कार्रवाई हुई है और वर्ष 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बने अवैध ढांचों को गिराने के आदेश दिए गए थे। कोर्ट ने साफ किया कि पर्यावरण से जुड़े ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।