मकर संक्रांति भारत का ऐसा त्योहार है, जो सर्दियों के बीच उमंग, रंग और सीख लेकर आता है. जनवरी के महीने में मनाया जाने वाला यह पर्व बच्चों के लिए बेहद खास होता है, क्योंकि इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, घर-घर में तिल और गुड़ की खुशबू फैल जाती है और परिवार के साथ हंसी-मजाक का मौका मिलता है. लेकिन मकर संक्रांति सिर्फ मस्ती तक सीमित नहीं है, इसके पीछे प्रकृति, परंपरा और सकारात्मक सोच का सुंदर संदेश भी छिपा है.
इस दिन सूर्य अपनी चाल बदलकर उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है. माना जाता है कि इसी के साथ ठंड कम होने लगती है और अच्छे दिनों की शुरुआत होती है. खेती से जुड़े इस पर्व पर नई फसल के आने की खुशी मनाई जाती है और किसान धरती व सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करते हैं. यही कारण है कि मकर संक्रांति को नई ऊर्जा, आशा और बदलाव का प्रतीक माना जाता है. बच्चों को जब यह समझ में आता है कि यह त्योहार हमें प्रकृति से जुड़ना और अच्छे कामों की ओर बढ़ना सिखाता है, तो उनका उत्साह और बढ़ जाता है.
देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति को अलग नामों और अंदाज में मनाया जाता है. कहीं पतंगबाजी का जोर होता है, तो कहीं खिचड़ी, पोंगल या तिल के लड्डू बनाए जाते हैं. लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं, दान करते हैं और मिल-जुलकर खुशियां मनाते हैं. बच्चों के लिए यह त्योहार सीख भी देता है कि मिल बांटकर खाना, बड़ों का सम्मान करना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहना हमारी संस्कृति की सुंदर पहचान है. इसी वजह से मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि खुशियों और संस्कारों का उत्सव बन जाती है.









