पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में दो नर्सों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिन्हें संदिग्ध निपाह वायरस संक्रमण के चलते जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि ये स्वास्थ्यकर्मी पूर्वा बर्दमान की कार्य-संबंधी यात्रा के दौरान संक्रमित हुए हो सकते हैं। हालांकि, संक्रमण का सटीक स्रोत अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, निपाह वायरस का मृत्यु दर 45 से 75 प्रतिशत तक है और इसका कोई विशिष्ट इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही इसे दुनिया के सबसे खतरनाक पशुजन्य वायरस में से एक बनाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकार को सहायता प्रदान की है और राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल को तैनात किया है, जो संभावित संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान और परीक्षण कर रहा है। एनसीडीसी के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि दोनों नर्सें कैसे संक्रमित हुईं, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
भारत में निपाह वायरस की पहली पहचान 1999 में मलेशिया में हुई थी। इसके बाद से यह वायरस देश में कई बार फैल चुका है। भारत में यह नौवां प्रकोप माना जा रहा है, जिसमें पश्चिम बंगाल और केरल प्रमुख प्रभावित राज्य रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फल चमगादड़ इस वायरस का प्राकृतिक वाहक हैं, लेकिन मनुष्यों में संक्रमण के लगातार फैलने के कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि किसी भी संदिग्ध लक्षण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें और सावधानी बरतें।









