महाराष्ट्र की अंबरनाथ और अकोट नगर पालिका चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में चौंकाने वाले घटनाक्रम देखने को मिले। सत्ता की जोड़-तोड़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐसे दलों से हाथ मिला लिया, जिनका वह आमतौर पर कड़ा विरोध करती है। हालांकि ये गठबंधन ज्यादा देर टिक नहीं पाए और कुछ ही घंटों में टूट गए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन स्थानीय स्तर पर बने गठबंधनों को सिरे से खारिज करते हुए जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। वहीं कांग्रेस ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अंबरनाथ के 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया।
अंबरनाथ: सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी शिवसेना सत्ता से बाहर
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं, जहां बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। चुनाव परिणामों में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन इसके बावजूद सत्ता उसके हाथ नहीं आई। चुनाव के बाद BJP ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का गठन कर लिया। इस गठबंधन ने बहुमत जुटाकर नगर परिषद की कमान संभाल ली और शिवसेना (शिंदे गुट) को विपक्ष में बैठने पर मजबूर कर दिया। इस गठबंधन के समर्थन से भाजपा नेता तेजश्री करंजुले को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस के साथ BJP की यह साझेदारी इसलिए भी सुर्खियों में रही, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं।
अकोट में AIMIM के साथ BJP का हाथ
अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में भी BJP ने चौंकाने वाला कदम उठाया। यहां पार्टी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के साथ मिलकर ‘अकोट विकास मंच’ बनाया। इस गठबंधन में शिवसेना (UBT), शिंदे गुट, अजित पवार और शरद पवार की एनसीपी तथा प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल थीं। 35 सदस्यीय नगर परिषद में BJP को 11 और AIMIM को 5 सीटें मिलीं। अन्य दलों के समर्थन से गठबंधन की संख्या 25 तक पहुंच गई और BJP की माया धुले को अध्यक्ष चुना गया। हालांकि इस गठबंधन पर पार्टी नेतृत्व ने नाराजगी जताई।
पार्टी नेतृत्व सख्त, नोटिस और निलंबन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि पार्टी की नीति के खिलाफ जाकर बनाए गए किसी भी गठबंधन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महाराष्ट्र BJP अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने अकोट विधायक प्रकाश भर्साखले को कारण बताओ नोटिस जारी किया। वहीं कांग्रेस ने अंबरनाथ मामले में सख्त कदम उठाते हुए अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को निलंबित कर दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया।
कांग्रेस से BJP में शामिल हुए पार्षद
कांग्रेस से निलंबित किए गए अंबरनाथ के सभी 12 पार्षद औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो गए। इस मौके पर रविंद्र चव्हाण ने कहा कि यह फैसला सत्ता की लालसा नहीं, बल्कि विकास के साझा लक्ष्य के तहत लिया गया है। उनका कहना था कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ही विकास के वादों को पूरा कर सकती है।
विपक्ष का हमला
शिवसेना (UBT) ने इन घटनाओं को “साझेदारी धर्म का विश्वासघात” करार दिया। पार्टी का आरोप है कि अंबरनाथ में यह पूरा राजनीतिक प्रयोग केवल शिंदे गुट को सत्ता से दूर रखने के लिए किया गया। शिवसेना ने BJP पर दोहरे मापदंड अपनाने और सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने का आरोप लगाया। नगरपालिका स्तर पर हुए इन गठबंधनों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि स्थानीय राजनीति में विचारधाराएं पीछे और सत्ता गणित आगे चल रहा है।









