Madhya Pradesh

दूषित पानी से मौतों पर हाई कोर्ट सख्त, एमपी सरकार की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

इंदौर में दूषित पेयजल के कारण हो रही मौतों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में दायर पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए। पिछली सुनवाई में सरकार ने दूषित पानी से केवल चार मौतों की जानकारी दी थी, जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक सामने आ रहे हैं।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि पीने का पानी ही असुरक्षित है, तो यह अत्यंत गंभीर और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने चिंता जताई कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे इंदौर शहर में पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रकरण में वह सीधे मुख्य सचिव से जवाब सुनना चाहता है। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि जैसे कोरोना काल में मेडिकल बुलेटिन जारी होते थे, उसी तरह दूषित पानी से फैल रही बीमारियों की नियमित जानकारी सार्वजनिक की जाए।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक दूषित पानी से 17 लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल 110 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि कुल 421 मरीजों में से 311 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। 15 मरीज अभी आईसीयू में उपचाराधीन हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।