नौकरीपेशा लोगों के लिए EPFO से जुड़ी एक अहम अपडेट सामने आई है। लंबे समय से कर्मचारियों की मांग थी कि ईपीएफ के तहत अनिवार्य योगदान के लिए बेसिक सैलरी की सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए। अब इस मुद्दे पर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि सैलरी लिमिट बढ़ाना एक संवेदनशील निर्णय है और इसे लागू करने से पहले सभी हितधारकों—ट्रेड यूनियन, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों—से व्यापक परामर्श जरूरी है।
मांडविया ने कहा कि यदि सीमा बढ़ाई जाती है तो कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी कम हो सकती है, क्योंकि उनका ईपीएफ में अधिक योगदान कटेगा। साथ ही नियोक्ताओं पर भी अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, जिससे भर्ती लागत प्रभावित होगी। इसलिए सरकार इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहती है, ताकि कर्मचारियों की सुरक्षा और उद्योगों की आर्थिक स्थिति दोनों सुरक्षित रहें।
गौरतलब है कि EPFO की सैलरी लिमिट में आखिरी बार 2014 में बदलाव किया गया था। वर्तमान नियमों के तहत 15,000 रुपये तक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफ अनिवार्य है, जबकि इससे अधिक सैलरी वालों के लिए यह वैकल्पिक है। अगर लिमिट 30,000 रुपये तक बढ़ती है तो संगठित क्षेत्र के अधिकतर कर्मचारी EPF कवरेज में आ जाएंगे, जिससे उनकी भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और मजबूत होगी।


