पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए और इसे राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) की दिशा में उठाया गया एक कदम बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
ममता बनर्जी ने संविधान दिवस के मौके पर बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए पत्रकारों से बातचीत में यह दावा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान भारत के लोगों और उनके विविध समुदायों को एक साथ जोड़ने वाला मार्गदर्शक दस्तावेज है। उनका कहना था कि संविधान हमारी संस्कृतियों, भाषाओं और भाषाई विविधता को संघीय और एकीकृत ढांचे में पिरोता है। सीएम ने कहा, “आज हमारे संविधान की दूरदर्शिता और उसके निर्माताओं की दूरदर्शिता को याद करने का दिन है। हम सभी को इस महान दस्तावेज के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए। विशेष रूप से डॉ. बी.आर. आंबेडकर और बंगाल के उन सदस्यों को श्रद्धांजलि, जिन्होंने संविधान को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने आगे कहा कि जब लोकतंत्र पर खतरा हो, जब धर्मनिरपेक्षता कमजोर पड़ रही हो और संघवाद को कमजोर किया जा रहा हो, तब संविधान द्वारा प्रदत्त मार्गदर्शन की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। ममता ने यह भी कहा कि संविधान दिवस न केवल भारत की स्वतंत्रता की स्मृति है, बल्कि यह हमें हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों की याद दिलाने वाला दिन है। साल 2015 से हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। 26 नवंबर, 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया था, जबकि इसके शेष प्रावधान 26 जनवरी, 1950 से लागू हुए, जब भारत गणराज्य बना। ममता बनर्जी ने इस अवसर पर नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा की अपील की और SIR को लेकर अपने विरोध का स्पष्ट संदेश दिया।









