कांग्रेस की ओर से एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली अब पार्टी के अंदर ही विवाद का कारण बन गई है। रैली में शामिल नहीं होने पर युवा कांग्रेस ने आठ राज्यों के करीब 215 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस फैसले के बाद संगठन में नाराजगी बढ़ने लगी है। वहीं, बीजेपी ने भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
दरअसल, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की ओर से एक बड़ी रैली आयोजित की गई थी। इसके दो दिन बाद यानी 3 नवंबर को युवा कांग्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए उन पदाधिकारियों की सूची जारी की, जिन्हें रैली में शामिल नहीं होने के चलते निलंबित किया गया है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश के 60, गुजरात के 49, झारखंड के 32, पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14 और हिमाचल प्रदेश के 13 पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें पांच उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव भी हैं। संगठन ने अगले आदेश तक उनका निलंबन जारी रखने की बात कही है।
पारिवारिक कारण के बावजूद हुई कार्रवाई
इस फैसले पर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के नेता रोहित रजोरिया ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनके साथी रवीश पाल सिंह अपने चाचा की तेरहवीं में शामिल होने के कारण रैली में नहीं पहुंच पाए थे। इसकी सूचना संगठन को पहले ही दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बिना नोटिस निलंबित कर दिया गया।
नेहा बोरा को लेकर भी नाराजगी
रोहित रजोरिया ने आरोप लगाया कि बीमारी, शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते रैली में नहीं पहुंच पाने वाले अन्य नेताओं पर भी कार्रवाई की गई। उन्होंने संगठन में पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अब नेहा बोरा को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
बीजेपी ने भी कसा तंज
युवा कांग्रेस की इस कार्रवाई पर बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के अपने नेता ही उसकी रैली में शामिल नहीं होना चाहते थे। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर अनुशासन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


