केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नए साल की शुरुआत में 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन सैलरी बढ़ोतरी को लेकर तुरंत राहत की उम्मीद सही नहीं है। सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है और इसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई है। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को आयोग का चेयरपर्सन बनाया गया है, जबकि सदस्य-सचिव की जिम्मेदारी आईएएस अधिकारी पंकज जैन को सौंपी गई है। इसके अलावा, आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर पुलक घोष आयोग में पार्ट-टाइम सदस्य के तौर पर शामिल होंगे।
हालांकि आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि 1 जनवरी से ही कर्मचारियों की सैलरी बढ़ जाएगी। फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत ही वेतन, डीए और अन्य भत्तों का भुगतान जारी रहेगा। सरकार की अधिसूचना के अनुसार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सामान्य रूप से 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, लेकिन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है।
इस प्रक्रिया के चलते नई वेतन संरचना तुरंत लागू होना संभव नहीं है। पहले आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा, फिर उन पर विचार और मंजूरी की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद ही नई पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर और संशोधित सैलरी लागू की जाएगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी 2027 या 2028 के दौरान मिलनी शुरू हो सकती है।
हालांकि एक राहत की बात यह है कि जब भी नई सिफारिशें लागू होंगी, एरियर 1 जनवरी 2026 से दिया जाएगा। यानी देरी के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकमुश्त बड़ी रकम मिलने की संभावना रहेगी। फिलहाल कर्मचारियों को धैर्य रखना होगा और आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ेगा।









