भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इसी विरासत को सम्मान देने और पर्यटन के महत्व को रेखांकित करने के लिए हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ घूमने-फिरने का नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक पहचान में पर्यटन की भूमिका को समझने का भी अवसर है।
आजादी के बाद पर्यटन को संगठित रूप देने के उद्देश्य से वर्ष 1948 में केंद्र सरकार ने पर्यटन विभाग की स्थापना की। इसके बाद 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के रूप में चुना गया, ताकि भारत की संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक मंच पर पहचान मिल सके। धीरे-धीरे यह दिन देश की सांस्कृतिक छवि को मजबूत करने का प्रतीक बन गया। राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को देश के विकास से जोड़ना है। यह दिवस जिम्मेदार और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देता है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलता है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय पर्यटन दिवस की थीम रखी गई है — “ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन”। इसका उद्देश्य गांवों और स्थानीय समुदायों को पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ना, उनकी आमदनी बढ़ाना और पारंपरिक संस्कृति व शिल्प को संरक्षित करना है।









