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क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार, जानें पौराणिक मान्यता

न्यूज़ फ्लिक्स भारत। हर साल जनवरी माह में उत्तर भारत खासकर पंजाब और हिमाचल प्रदेश में लोहड़ी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है. लोहड़ी के दिन सभी लोग शाम के समय आग जलाकर अलाव के चारों तरफ इकट्ठा होते हैं और अग्निदेव को मूंगफली, खील, चिक्की और गेहूं की बालियां अर्पित करते हैं. आइए जानते हैं कि वर्ष 2024 में लोहड़ी पर्व की सही तिथि, मुहूर्त और इसका महत्व क्या है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का संकेत देती है, जो नई फसल के आगमन और दिन के उजाले के बढ़ने का प्रतीक है. साल 2025 में लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी, जबकि मकर संक्रांति 14 जनवरी को होगी.

लोहड़ी के त्योहार का आयोजन विभिन्न मान्यताओं के आधार पर किया जाता है. एक प्रमुख पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव का अपमान करते हुए उन्हें यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप माता सती ने अपने पति की अनदेखी से दुखी होकर अग्निकुंड में आत्मदाह कर लिया. इस घटना के बाद से लोहड़ी का पर्व प्राश्चित के रूप में मनाया जाता है. इसी कारण इस अवसर पर विवाहित कन्याओं को घर बुलाकर उनका सम्मान किया जाता है.