Entertainment

IMDb रेटिंग पर क्यों होता है भरोसा? जानिए कैसे काम करता है इसका वेटेड सिस्टम

आजकल किसी भी फिल्म या वेब सीरीज को देखने से पहले दर्शक सबसे पहले उसकी IMDb रेटिंग चेक करते हैं। 1 से 10 के पैमाने पर दी जाने वाली यह रेटिंग दुनियाभर में विश्वसनीय मानी जाती है। लेकिन यह केवल साधारण औसत नहीं होती, बल्कि इसके पीछे एक जटिल गणितीय और तकनीकी सिस्टम काम करता है, जिसे खासतौर पर छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

IMDb दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन फिल्म डेटाबेस है, जहां करोड़ों यूजर्स अपनी राय दर्ज करते हैं। हालांकि यहां हर वोट की अहमियत समान नहीं होती। प्लेटफॉर्म “वेटेड एवरेज” सिस्टम का इस्तेमाल करता है, यानी हर यूजर के वोट को अलग-अलग वेटेज दिया जाता है। लंबे समय से सक्रिय और नियमित रूप से रेटिंग देने वाले विश्वसनीय यूजर्स के वोट को ज्यादा महत्व मिलता है, जबकि नए या संदिग्ध अकाउंट्स का प्रभाव सीमित कर दिया जाता है। बड़ी फिल्मों की रिलीज के समय अक्सर 1/10 या 10/10 की बाढ़ लाकर रेटिंग प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

IMDb का एडवांस एल्गोरिद्म ऐसे असामान्य वोटिंग पैटर्न यानी “आउटलायर्स” की पहचान कर लेता है और उनका असर अंतिम स्कोर पर कम कर देता है। इससे फर्जी अकाउंट बनाकर किसी फिल्म को प्रमोट या नुकसान पहुंचाने की कोशिशें ज्यादा असरदार नहीं हो पातीं। IMDb की टॉप 250 फिल्मों की सूची के लिए तो और भी सख्त फॉर्मूला अपनाया जाता है, जिसे “बेयसियन एस्टीमेट” कहा जाता है। इसमें केवल नियमित और भरोसेमंद यूजर्स के वोट शामिल किए जाते हैं और न्यूनतम वोट सीमा भी तय होती है।

हालांकि कोई भी सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं हो सकता, लेकिन पारदर्शी प्रक्रिया, एडवांस एल्गोरिद्म और मल्टी-लेयर फिल्टर की वजह से IMDb रेटिंग आज भी सिनेप्रेमियों के लिए किसी फिल्म की गुणवत्ता का पहला संकेत मानी जाती है।