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पश्चिम एशिया तनाव का असर रसोई तक, गैस संकट के बीच केरोसिन की वापसी

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक महसूस किया जाने लगा है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने करीब एक दशक बाद घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन यानी मिट्टी के तेल का आवंटन बढ़ाने का फैसला किया है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसी रास्ते से भारत को रोजाना 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल मिलता है, जबकि देश की 55 प्रतिशत एलपीजी और करीब 30 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति भी यहीं से होती है। आपूर्ति बाधित होने से पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है, जिसके कारण होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिलने वाली गैस में कटौती की गई है।

इस संकट को देखते हुए सरकार ने राज्यों के लिए निर्धारित एक लाख किलोलीटर के कोटे के अलावा 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। वहीं होटल और रेस्तरां को अस्थायी रूप से कोयला, बायोमास और आरडीएफ पेलेट जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दी गई है।

घबराहट में हो रही अतिरिक्त गैस बुकिंग को रोकने के लिए सरकार ने नया नियम भी लागू किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग अब 45 दिन बाद ही हो सकेगी, जबकि शहरी इलाकों में यह सीमा 25 दिन तय की गई है। सरकार का कहना है कि आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई देशों से गैस की व्यवस्था की जा रही है।