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भारत के मंदिरों की दौलत 9 लाख करोड़ पार, कई देशों की GDP से ज्यादा संपत्ति

भारत के प्रमुख मंदिरों की संपत्ति को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है। तिरुपति बालाजी मंदिर की कुल संपत्ति 3.38 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो दुनिया के 100 से अधिक देशों की GDP से भी ज्यादा है। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक, यहां रोजाना 1 से 5 करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है, जबकि एक दिन में 4.88 करोड़ रुपये तक दान दर्ज किया गया। वहीं पद्मनाभस्वामी मंदिर को दुनिया का सबसे अमीर धर्मस्थल माना गया है। मंदिर के पास मौजूद प्राचीन खजाने—जिसमें सोना, हीरे और बहुमूल्य आभूषण शामिल हैं—की कीमत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह खजाना सरकार और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सुरक्षित है।

देश के अन्य बड़े मंदिर भी संपत्ति के मामले में पीछे नहीं हैं। जगन्नाथ मंदिर के पास 60 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन और करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। वहीं श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की संपत्ति भी 6,000 से 8,000 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है, जहां रोजाना एक करोड़ रुपये से अधिक का दान आता है। सोने की कीमतों में तेजी ने इन मंदिरों की संपत्ति को और बढ़ा दिया है। पिछले दो वर्षों में तिरुपति मंदिर की संपत्ति 35%, जगन्नाथ मंदिर की 50% और पद्मनाभस्वामी मंदिर की संपत्ति लगभग दोगुनी हो चुकी है। इन मंदिरों के पास हजारों टन सोना भी मौजूद है—पद्मनाभस्वामी मंदिर के पास करीब 1,500 टन, तिरुपति के पास 11.3 टन और वैष्णो देवी मंदिर के पास 1.2 टन सोना है। कुल मिलाकर, भारत के शीर्ष 10 मंदिरों की संपत्ति 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, जो इन्हें दुनिया के सबसे समृद्ध धार्मिक संस्थानों में शामिल करती है।