अमेरिका में H-1B वीज़ा से जुड़े नियमों में हालिया बदलाव का सीधा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ा है। दिसंबर में वीज़ा नवीनीकरण के लिए भारत आए सैकड़ों H-1B वर्कर्स अचानक पैदा हुई प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण यहीं फंस गए हैं। अमेरिकी दूतावासों ने बिना पूर्व सूचना कई रिन्यूअल अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए, जिससे प्रभावित लोगों को महीनों बाद की नई तारीखें मिलीं।
इस अनिश्चितता के बीच टेक कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं। गूगल ने अपने कुछ कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे फिलहाल अमेरिका से बाहर यात्रा न करें, क्योंकि वापस लौटने में लंबा समय लग सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार दिसंबर के मध्य से अंत तक तय अपॉइंटमेंट्स पर अचानक लिए गए फैसलों से बड़ी संख्या में भारतीय आवेदक प्रभावित हुए।
देरी की एक प्रमुख वजह नई “ऑनलाइन प्रेज़ेंस रिव्यू” नीति बताई जा रही है। इसके तहत आवेदकों की सोशल मीडिया और डिजिटल गतिविधियों की अतिरिक्त जांच की जा रही है, ताकि संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से जरूरी है, लेकिन इससे वीज़ा प्रक्रिया धीमी हो गई है।
H-1B कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका की स्किल्ड वर्कफोर्स की रीढ़ माना जाता रहा है। वर्तमान में इस वीज़ा के 70 प्रतिशत से अधिक धारक भारतीय हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के दौरान इमिग्रेशन पर सख्त रुख और बढ़ी फीस जैसे फैसलों ने इस प्रोग्राम को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति असाधारण है और पहले कभी इतनी व्यापक अव्यवस्था नहीं देखी गई। कंपनियों और कर्मचारियों—दोनों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण दौर बन गया है, जहां करियर प्लानिंग से लेकर पारिवारिक फैसले तक प्रभावित हो रहे हैं।









