पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शहबाज शरीफ सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनआक्रोश चरम पर है. आवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई में आम नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं, जो आर्थिक शोषण, संसाधनों की लूट और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों द्वारा की गई हिंसा में अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल हुए हैं.
भारत ने पीओके में हो रही इस अशांति को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये घटनाएं पाकिस्तान की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों का परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना द्वारा पीओके के नागरिकों पर की गई बर्बरता मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और पाकिस्तान को इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
इस बीच, हालात काबू में लाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीओके भेजा है, जिसमें वरिष्ठ मंत्री और राजनेता शामिल हैं. यह दल नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांगों में शरणार्थी सीटों की समाप्ति, बिजली परियोजनाओं से संबंधित कोर्ट आदेश का पालन, स्वास्थ्य सुविधाएं, और स्थानीय लोगों को उनका हक़ दिलाने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. शोक सभाओं में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं और विरोध तब तक जारी रखने का संकल्प ले रहे हैं, जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं.









