जेनेवा में दूसरे दौर की वार्ता के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। व्हाइट हाउस ने स्वीकार किया कि कुछ मुद्दों पर प्रगति हुई है, लेकिन मतभेद अब भी गहरे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका हिंद महासागर स्थित अपने सैन्य अड्डों से कार्रवाई कर सकता है। क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की तैनाती पहले ही बढ़ाई जा चुकी है।
तनाव के जवाब में ईरान ने रूस के साथ ओमान की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है। तेहरान का कहना है कि यह अभ्यास शांति और क्षेत्रीय संतुलन के लिए है, लेकिन इसे संभावित सैन्य दबाव के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। रूस ने भी चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला व्यापक परिणाम ला सकता है।
विवाद की जड़ ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोके और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करे, जबकि ईरान प्रतिबंध हटाने की शर्त पर ही आगे बढ़ने को तैयार है। इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते समन्वय ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। दुनिया की नजरें अब इस पर हैं कि कूटनीति सफल होगी या टकराव बढ़ेगा।









