अमेरिका के बाल्टीमोर में जन्मे 46 वर्षीय मैथ्यू एरन वैनडाइक अब भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में हैं। उन पर आतंकवाद, सीमा पार गतिविधियों और ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण देने जैसे गंभीर आरोप हैं। वैनडाइक ने लीबिया, सीरिया और यूक्रेन के संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रहकर खुद को कभी भाड़े का सैनिक, कभी खुफिया विश्लेषक और कभी लोकतंत्र का सैनिक साबित किया।
वह सुरक्षा अध्ययन में मास्टर्स की डिग्रीधारी हैं और पश्चिम एशिया के मामलों में गहरी पकड़ रखते हैं। उनकी संस्था, सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल, कथित तौर पर आतंक और तानाशाही के खिलाफ लड़ने वालों को प्रशिक्षण देती है, लेकिन वास्तविकता में इसमें गैर-राज्य हथियारबंद गुटों को ड्रोन बनाने, चलाने और निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण भी शामिल था।
एनआईए के अनुसार, वैनडाइक और उनके छह यूक्रेनी सहयोगी मिजोरम में बिना अनुमति प्रवेश कर म्यांमार की सीमा पार कर चिन राज्य में सक्रिय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दे रहे थे। 12 मार्च को वह दुबई जाने के लिए कोलकाता हवाई अड्डे पर थे, तभी खुफिया एजेंसियों ने उन्हें गिरफ्तार किया।
इस घटना ने उत्तर पूर्व भारत में बाहरी हस्तक्षेप और आधुनिक युद्ध तकनीक के गलत इस्तेमाल का खतरा स्पष्ट कर दिया है। भारत के लिए यह मामला केवल कानून का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का है। वैनडाइक की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि देश की सीमाओं और सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब उनकी कहानी अदालतों और जांच एजेंसियों के हाथ में है, जो उनके कृत्यों का सही मूल्यांकन करेंगी।









