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ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर भड़का व्हाइट हाउस, अमेरिका में विवाद

2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद अमेरिका में सियासी हलचल तेज हो गई है. यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से देश में लोकतंत्र की बहाली और सत्ता के केंद्रीकरण के खिलाफ आवाज़ उठाई. लेकिन यह फैसला अमेरिका में खासकर डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों के बीच विवाद का कारण बन गया.

दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद थी कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा, खासतौर पर उनके कार्यकाल में हुए अब्राहम समझौते जैसे प्रयासों को देखते हुए, जिनमें उन्होंने इज़राइल और अरब देशों के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ताएं कराईं. नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि नोबेल कमिटी ने शांति से अधिक राजनीति को महत्व दिया है. व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर ने कहा कि “ट्रंप शांति के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे। वह इच्छाशक्ति से पहाड़ों को हिला सकते हैं. उनके जैसा कोई नहीं.” ट्रंप समर्थकों का मानना है कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर जो कूटनीतिक उपलब्धियां हासिल कीं, वे नोबेल पुरस्कार के योग्य थीं. मचाडो को यह सम्मान मिलने से अब अमेरिका में यह बहस गर्म है कि क्या नोबेल पुरस्कार केवल शांति के लिए हैं या राजनीति से भी प्रभावित होते हैं.