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बम की झूठी धमकी देने वालों पर लगेगा करोड़ों का जुर्माना, नई जांच तकनीक से अपराधियों की जल्द होगी गिरफ़्तारी

देशभर के स्कूलों में बम धमकियों की झूठी खबरें हाल के वर्षों में लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में अहमदाबाद और वडोदरा के कई स्कूलों में ऐसी अफवाहें फैलने से प्रशासन, छात्र और अभिभावक कई घंटों तक दहशत में रहे। हालांकि जांच में सभी मामले झूठे पाए गए, लेकिन इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बार-बार ऐसी घटनाओं से छात्र डरते हैं और स्कूल आने में हिचकिचाते हैं।

भारत में झूठी बम धमकी गंभीर अपराध मानी जाती है। IPC की धारा 505(1)(b) के तहत किसी को डराने या अफवाह फैलाने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। सेक्शन 507 के तहत अनाम धमकी देने पर 2 साल की अतिरिक्त जेल और सेक्शन 182 के तहत पुलिस को झूठी रिपोर्ट देने पर 6 महीने तक की सजा या जुर्माना लग सकता है। अगर मामला आतंकवाद से जुड़ा दिखे तो UAPA के तहत आजीवन कारावास तक हो सकता है।

पुलिस इन मामलों में साइबर फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल करती है। धमकी मिलने पर बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड सक्रिय होती हैं, स्कूल खाली कराया जाता है और सर्च ऑपरेशन किया जाता है। ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए भेजी गई धमकियों को IP ट्रेस और डेटा रिक्वेस्ट के माध्यम से ट्रैक किया जाता है। VPN या विदेशी सर्वर इस्तेमाल करने वाले अपराधियों के लिए इंटरनेशनल एजेंसियों की मदद ली जाती है।

सरकार और स्कूल प्रशासन नई रणनीतियां अपना रहे हैं। MeitY VPN पर नए नियम बना रही है और स्कूल स्तर पर मॉक ड्रिल्स, CCTV बढ़ाना, एंट्री चेक और अभिभावकों से सहयोग जैसी पहल शुरू की जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और त्वरित रिपोर्टिंग ही इन झूठी धमकियों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।