भारत अगले साल अपनी न्यूक्लियर ट्रायड के समुद्री हिस्से को और मजबूत करेगा। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि तीसरी परमाणु-संचालित बैलेस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन अंतिम परीक्षण चरण में है और जल्द ही नौसेना में शामिल हो जाएगी। 7000 टन क्षमता वाली यह पनडुब्बी K-4 बैलेस्टिक मिसाइलों से लैस होगी और समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगी। इसी तरह चौथी SSBN (S-4) को 2027 तक शामिल करने की संभावना है।
भारत रूस से अकुला-क्लास SSN INS चक्र-3 भी प्राप्त करेगा, जो 2027-28 में डिलीवर होगी। यह परमाणु-संचालित हमला पनडुब्बी समुद्री मुकाबलों और रणनीतिक लक्ष्य नष्ट करने में सक्षम होगी। प्रधानमंत्री-नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ने दो स्वदेशी SSN निर्माण को मंजूरी दी है, जिनकी क्षमता 9800 टन और रिएक्टर 190 MW का होगा। पहली पनडुब्बी 2036–37 में और दूसरी दो साल बाद शामिल होगी।
भारत की SSBN और SSN क्षमता अमेरिका, रूस और चीन की तुलना में अभी छोटी है, लेकिन नई परियोजनाओं से भविष्य में 13,500 टन क्षमता वाली बड़ी SSBN और उन्नत परमाणु पनडुब्बियों के बेड़े के साथ समुद्री शक्ति बढ़ेगी। यह कदम भारत की नो-फर्स्ट-यूज नीति के तहत अंतिम और विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और सुदृढ़ करेगा।









