छत्तीसगढ़ के छिंदवाड़ा में हाल ही में हुई बच्चों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को लेकर सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों में हिमाचल प्रदेश की फार्मा कंपनियों के साथ जोड़े जा रहे दावों को ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन, हिमाचल प्रदेश ने पूरी तरह से खारिज किया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन खबरों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और यह पूरी तरह से भ्रामक और झूठी हैं.
ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने प्रेस वार्ता में बताया कि मध्य प्रदेश के FDA द्वारा एक कफ सिरप ‘NASTRO-DS’ (बैच नंबर AQD2559) के सैंपल भेजे गए थे, जो कि एक हिमाचल प्रदेश स्थित कंपनी, एक्विनोवा फार्मास्युटिकल्स (बद्दी, सोलन) द्वारा निर्मित है. जांच रिपोर्ट के अनुसार, सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा अनुमेय सीमा के भीतर पाई गई और उसे “मानक गुणवत्ता” का घोषित किया गया है.
वहीं दूसरी ओर, तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल निदेशक ने ‘COLDRIF Syrup’ (बैच नं. SR-13), जो कि एम/एस स्रेसन फार्मास्युटिकल्स, तमिलनाडु द्वारा निर्मित है, में डाइएथिलीन ग्लाइकोल की मिलावट की पुष्टि की है। यह एक जहरीला तत्व है जो किडनी फेलियर का कारण बन सकता है. इस सिरप की बिक्री और उपयोग को हिमाचल प्रदेश में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है.
ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बनी कोई भी दवा वर्तमान में इस घटना से जुड़ी नहीं है. फिर भी, एहतियातन कार्रवाई करते हुए, हिमाचल में ओरल लिक्विड (विशेषकर प्रोपाइलीन ग्लाइकोल आधारित) उत्पाद बनाने वाली कंपनियों पर जोखिम आधारित निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है. यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.
सरकार ने ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल निर्माण इकाइयों से ही नहीं, बल्कि खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों से भी सैंपल लें ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया में फैलाई जा रही भ्रामक खबरों से सावधान रहें.









